२६२ - मेरी आधुनिक मधुशाला
बाद बड़े अर्से के अवसर आज पाया पियूँगा जी भरके हाला
लबों से अविरल छलकेगी सागरमय आज मेरी मधुशाला
रूपसी सुरबाला मेरी प्रियतमा प्यारी दिल से पिलाती हाला
मधुशाला मुझको जन्नत से प्रिय लगती नहीं कोई टोकने वाला
बाद बड़े अर्से के अवसर आज पाया पियूँगा जी भरके हाला
लबों से अविरल छलकेगी सागरमय आज मेरी मधुशाला
रूपसी सुरबाला मेरी प्रियतमा प्यारी दिल से पिलाती हाला
मधुशाला मुझको जन्नत से प्रिय लगती नहीं कोई टोकने वाला
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