Friday, 8 July 2016

१६३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



कल पर विश्वास नहीं मुझकों आज पियूँगा अमृतसम सागरमय हाला 
सबसे प्रियतम मुझको लगती रूपसी बाला मेरी आधुनिक मधुशाला 
मादक हाला का स्वाद पसंद मुझकों और पसंद फ़िज़ा मेरी मधुशाला 
जन्नते हूरो का मेला सा नित लगता मुख को प्रियतम लगती हाला 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव