Friday, 8 July 2016

२६४ मेरी आधुनिक मधुशाला

२६४ मेरी आधुनिक मधुशाला

आज मिला अवसर मुझको आज पियूँगा अमृतसम मादक हाला 
झूम झूम के आज नाचूंगा संग रूपसी बाला मेरी आधुनिक मधुशाला 
नगर सेठ ने क्या खूब बनाई  दिव्य अनुपम मेरी आधुनिक मधुशाला 
सांझ ढले नित मेला सा लगता चिर यौवन रूपसी बाला मेरी मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव