२६४ मेरी आधुनिक मधुशाला
आज मिला अवसर मुझको आज पियूँगा अमृतसम मादक हाला
झूम झूम के आज नाचूंगा संग रूपसी बाला मेरी आधुनिक मधुशाला
नगर सेठ ने क्या खूब बनाई दिव्य अनुपम मेरी आधुनिक मधुशाला
सांझ ढले नित मेला सा लगता चिर यौवन रूपसी बाला मेरी मधुशाला
आज मिला अवसर मुझको आज पियूँगा अमृतसम मादक हाला
झूम झूम के आज नाचूंगा संग रूपसी बाला मेरी आधुनिक मधुशाला
नगर सेठ ने क्या खूब बनाई दिव्य अनुपम मेरी आधुनिक मधुशाला
सांझ ढले नित मेला सा लगता चिर यौवन रूपसी बाला मेरी मधुशाला
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