Friday, 8 July 2016

१६५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



आज पियूँगा तेरे लबों से प्रियतम दिव्य अनुपम सागरमय हाला 
मादक लब होंगे प्याला प्रियतमा और मोहब्बत होगी मादक हाला 
झूम उठेगा कृतक अंजान डगर दिवाली सम चहकेगी मेरी मधुशाला 
सारे जहाँ में बजेगा डंका और लहरायेगी पताका मेरी आधुनिक मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव