Saturday, 9 July 2016

२७४ - मेरी आधुनिक मधुशाला

२७४  -  मेरी आधुनिक मधुशाला

मेरी मधुशाला आके प्यास है बढ़ती देख अनुपम मादक हाला
मादक हाला अविरल है छलकती देख परदेशी का खाली प्याला
कभी जा परदेशी बस ही कहता और ना थकती कमसिन बाला
दोनों में होड़ मची मधुशाला मुझसा पीनेवाला तुम सा पिलानेवाला  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव