Saturday, 9 July 2016

१७५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



जितनी मुकद्दर में लिखी रब ने उतनी अवश्य ही पियूँगा हाला
लिखा तक़दीर में कनक का प्याला उसी में पीते रहूँगा मैं हाला
कोई लाख करे चतुराई मुकद्दर का लेख मिटेगा न मेरे भाई
मेरे नसीब में बाला की सागरमय हाला अनुपम यही बड़ी सच्चाई 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव