Saturday, 9 July 2016

२७६ - मेरी आधुनिक मधुशाला

२७६  -  मेरी आधुनिक मधुशाला

मान अपमान से रिश्ता तोड़ दिया सारे जहाँ से मुख मैंने मोड़ लिया
जब हुई यारी अपनी मेरी आधुनिक मधुशाला और मोहिनी सुरबाला
बाला की सागरमय हाला से रिश्ता जोड़ लिया बना जिंदगी मेरी प्याला
अब मेरी मंदिर मस्जिद मेरी आधुनिक मधुशाला और अनुपम प्याला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव