Tuesday, 5 July 2016

१२८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


रूपसी की सागरमय मादक हाला पीके जब मैं बहक जाता
मेरी आँखों से टप टप - टप टप सागरमय अमृतसम टपकती
मेरे साथ सारी कायनातो फ़िज़ा पीके बहकती सी  लगती
मेरी आधुनिक मधुशाला के चौबारे जन्नते हूर बाला मचलती 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव