२६० - मेरी आधुनिक मधुशाला
रूपसी बाला निसंकोच पिलाती सागरमय मादक हाला मेरी मधुशाला
कभी ना खाली होती सागरमय अनुपम कभी न खाली होता प्याला
सुरबाला की सागरमय अनुपम दिव्य पेय सोमरस सम मादक हाला
मेरी मधुशाला की शान मनोहर मेरी प्रेयसी कमसिन अल्हड सुरबाला
रूपसी बाला निसंकोच पिलाती सागरमय मादक हाला मेरी मधुशाला
कभी ना खाली होती सागरमय अनुपम कभी न खाली होता प्याला
सुरबाला की सागरमय अनुपम दिव्य पेय सोमरस सम मादक हाला
मेरी मधुशाला की शान मनोहर मेरी प्रेयसी कमसिन अल्हड सुरबाला
No comments:
Post a Comment