Thursday, 7 July 2016

२६० - मेरी आधुनिक मधुशाला

२६०  - मेरी आधुनिक मधुशाला

रूपसी बाला निसंकोच पिलाती सागरमय मादक हाला मेरी मधुशाला
कभी ना खाली होती सागरमय अनुपम कभी न खाली होता प्याला 
सुरबाला की सागरमय अनुपम दिव्य पेय सोमरस सम मादक हाला
मेरी मधुशाला की शान मनोहर मेरी प्रेयसी कमसिन अल्हड सुरबाला 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव