Sunday, 10 July 2016

१८३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



प्याले सम ही गढ़ा मनोहर ये जिस्म बृह्मा ने अनुपम मातावाला
मादक हाला का अनुपम प्याला लबों  से लग बना अमृत हाला
जीवन में जब कभी दुःख दर्द है आते उसे हराती अनुपम हाला
चोबीसों घंटे अलख जगाती सुरबाला मेरी आधुनिक मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव