२८- मेरी आधुनिक मधुशाला
कनक निर्मित कोहीनूर से सुन्दर मेरा दिव्य अनुपम मादक प्याला
इस प्याले में आकर अमृतसम है हो जाती बाला की सागरमय हाला
मेरी मधुशाला की रूपसी बाला के कोमल कर में आकर झूमता प्याला
इस अनुपम प्याले में मादक हाला पीकर चहक उठता कृतक मतवाला
कनक निर्मित कोहीनूर से सुन्दर मेरा दिव्य अनुपम मादक प्याला
इस प्याले में आकर अमृतसम है हो जाती बाला की सागरमय हाला
मेरी मधुशाला की रूपसी बाला के कोमल कर में आकर झूमता प्याला
इस अनुपम प्याले में मादक हाला पीकर चहक उठता कृतक मतवाला
No comments:
Post a Comment