Sunday, 10 July 2016

१८२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

२८- मेरी आधुनिक मधुशाला

कनक निर्मित कोहीनूर से सुन्दर मेरा दिव्य अनुपम मादक प्याला
इस प्याले में आकर अमृतसम है हो जाती बाला की सागरमय हाला
मेरी मधुशाला की रूपसी बाला के कोमल कर में आकर झूमता प्याला
इस अनुपम प्याले में मादक हाला पीकर चहक उठता कृतक मतवाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव