बाद मौत के मेरी यारों कभी ना अश्क तुम आँखों में लाना
चौराहे श्रृद्धांजली सभा तुम करना हाला पीना ख़ुशी मनाना
कभी न भूले से अश्क गिराना मुझे याद करना और याद आना
मेरी रूह सदा साथ तुम्हारे रहेगी भूले से भी मुझे ना भुलाना
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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