Monday, 4 July 2016

१२४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

  
कभी कभी प्रतीक्षा भी करनी है पड़ती मेरी आधुनिक मधुशाला 
अंजान डगर के परदेशी को भाती रूपसी बाला की मादक हाला 
हाला पीकर हुआ दीवाना सारे जहाँ को पलक झपकते भुला डाला 
मुझको याद सदा है रहती कृतक अंजान डगर की मधुशाला हाला  

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव