२२५ - मेरी आधुनिक मधुशाला
संगीत की स्वर लहरी पे झूमती रूपसी बाला मधुशाला
जन्नत का सा समां नित लगता मेरी आधुनिक मधुशाला
अविरल सागरमय से बहती दिव्य अनुपम मादक हाला
मेरी मधुशाला की मादक हाला ने सुरों की भी दीवाना बन डाला
संगीत की स्वर लहरी पे झूमती रूपसी बाला मधुशाला
जन्नत का सा समां नित लगता मेरी आधुनिक मधुशाला
अविरल सागरमय से बहती दिव्य अनुपम मादक हाला
मेरी मधुशाला की मादक हाला ने सुरों की भी दीवाना बन डाला
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