Sunday, 31 July 2016

आरजुयें जिन्दगी

तेरी हरेक सुब खुबसूरत दिलकश प्यारी हो
तेरी हरेक रात दमके दिवाली सी
महके जिन्दगी तेरी केशर की महक से यारा
तेरी हरेक आरजू रब की हमारी हो
चंदन का सा महके आँगन तेरा
मोहब्बत के उपवन में चाँदनी की यारी हो
शबनमी मोतियों सें महके उपवन मोहब्बत का
गोरइया की चहकती किलकारी हो
तेरे नूरे रूखकार से रौशन मेरा दिन
तेरी अँखियों की सी रौशन निशा दुलारी हो
मोहब्बत के आँगन की प्यारी कुमुदनी तू
हरेक रात तेरे दल में जीने की आरजू पूरी हमारी हो

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव