Saturday, 9 July 2016

१६९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



विश्व्मोहिनी कमसिन मुखड़ा सुन्दर लब दिव्य अनुपम प्याला
अविरल छलक रही जिनसे दिव्य अनुपम अमृतसम हाला
आज कृतक ही साकी और वही मादक अनुपम हाला पीनेवाला
मेरी मधुशाला के चौबारे सजी है महफिल दौड़ रही मादक हाला 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव