Sunday, 10 July 2016

१९२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



यारों बदल जाती है ज़िंदगानी आकर मेरी आधुनिक मधुशाला
महकती है जवानी पीकर सोमरस सम अनुपम पावन हाला
झूमती सी लगती है हरेक संय रब दी अनुपम कायनात की
हरेक रात परवान चढ़ती और संवरती है कमसिन सुरबाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव