मेरी मधुशाला में सागरमय पीने में बहुत मज़ा आता है
दिल बाग़ बाग़ हो जाता जब पटियाला पैग नज़र आता है
सागरमय छलकती है शबनमी होठों से यार मज़ा आता है
जब यौवन पे होती है मेरी मधुशाला साकी हाला छलकता है
दिल बाग़ बाग़ हो जाता जब पटियाला पैग नज़र आता है
सागरमय छलकती है शबनमी होठों से यार मज़ा आता है
जब यौवन पे होती है मेरी मधुशाला साकी हाला छलकता है
No comments:
Post a Comment