Wednesday, 20 July 2016

२६५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

मेरी मधुशाला में सागरमय पीने  में बहुत मज़ा आता है
दिल बाग़ बाग़ हो जाता जब पटियाला पैग नज़र आता है
सागरमय छलकती है शबनमी होठों से यार मज़ा आता है
जब यौवन पे होती है मेरी मधुशाला साकी हाला छलकता है


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव