तू समझ
सच्चाई को स्वीकार कर
हकीकत से मुह न मोड
सच्चाई ये है
कि तू डरती है
मोहब्बत करती है
पागलपन की हद तक
बट डर जाती है
समाज से
परिवार से
बेटी से
मोहब्बत सीमाओ मे
अच्छी लगती है मेरे यार
सरहदों मे फलती है मोहब्बत
महकता है प्यार
रब की इबादत
होती है मोहब्बत
रब की इनायत
होता है प्यार
कोशिश कर
सच्चाई से न डर
मेरे यार
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Wednesday, 13 July 2016
मोहब्बत का उपवन ३
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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