Monday, 25 July 2016

२९४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

जब कभी मयखाना बंद यार होगा  तेरी नज़रो से पी लेंगे हाला
मेरे आधुनिक मयखाने को ज़माने में कोई बंद न करने पायेगा
जो कोई कोशिश भी करेगा सागरमय पीके जश्न मधुशाला में मनायेगा
साकी की मादक हाला पीके वो काफ़िर होशो हवास अपने गवायेगा 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव