गर तेरा सहारा मिल जायें
सहराओं में कमल खिल जायें
बागों में बहारें आ जायें
मेरा यार रूखसार से जब चिल्मन हटायें
तेरी महक से फिजा सकुचायें
बेमौसम कुमुदनी खिल जायें
मेघों से मादक हाला बरसने लगे
मेरा महबूब जब मुस्कायें
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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