Tuesday, 9 August 2016

तू मोहब्बत है हमारी, तेरी महक से महकती है कायनात ये सारी

यही दिली आरजू हमारी
सींचू तेरे उपवन की क्यारी
मेरे महबूब तूही है मोहब्बत हमारी
तेरे नूर से रौशन है दुनियाँ हमारी
जिन्दगी से भी खुबसूरत और प्यारी
दिली उपवन की सबसे हँसीं कुमुदनी
तेरी मोहब्बत तेरी मुस्कुराहट लगती है प्यारी
तेरी यारी सबब ए जिन्दगी प्यारी
तूही तो है पहली मोहब्बत आखिरी ख्वाहिश हमारी

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव