यही दिली आरजू हमारी
सींचू तेरे उपवन की क्यारी
मेरे महबूब तूही है मोहब्बत हमारी
तेरे नूर से रौशन है दुनियाँ हमारी
जिन्दगी से भी खुबसूरत और प्यारी
दिली उपवन की सबसे हँसीं कुमुदनी
तेरी मोहब्बत तेरी मुस्कुराहट लगती है प्यारी
तेरी यारी सबब ए जिन्दगी प्यारी
तूही तो है पहली मोहब्बत आखिरी ख्वाहिश हमारी
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 9 August 2016
तू मोहब्बत है हमारी, तेरी महक से महकती है कायनात ये सारी
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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