जानापाव की गोद से निकली
चम्बल चंचल सुकुमारी
पहाडो का सीना चीरती
निकली अल्हड नार
धीर गंभीर अति पावन
सहराओ से निकली
अविरल चलती
जन जन की प्यास बुझाती
झुरमुट पेड झाडियों को जीवन देती
गम्भीरता के दामन में लिपटी
अविरल आगे बढती
महबूब की मानिंद मोहब्बत लुटाती
जन जन की वेदना हरती
जीवन दायिनी अति सुकुमारी
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Thursday, 11 August 2016
सरिता "चम्बल"
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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