न जाने तू मेरे मुकद्दर में है भी या नही
गर मेरे नसीब में है तू लिखी तब तो तुझे पाउँगा
गर तू नही मेरे मुकद्दर में रब से तुझे मांग लूँगा
अम्बर के सप्तरंगी सितारों से माँग तेरी सजाउँगा
तेरे कदमों में सर झुका के मोहब्बत की वादी बसाउँगा
साँवन की शबनमी मोतियों की चादर उढा के सपनों की मलिका दिल में तुझे बसाउँगा
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Thursday, 11 August 2016
नसीब का खेल
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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