Thursday, 11 August 2016

पूनम की रात

पूनम की रात
शबनमी मोतियों की बरसात
तडपते मचलते दिली जजबात
बहुत बहुत आती है
शबनमी चाँदनी में
पूनम के दिन तुम्हारी याद
कैसे समझाऊ
दिले नादाँ मानता ही नही
चाँदनी पूनम की
पूनम का नूर
अमानत है सारे जहाँ की
नही सिर्फ तेरे गुलिस्ता के लिये
मै भृमर अंजान डगर
न कोई मंजिल है मेरी
ना ही कोई कारवाँ
दोनों जहान का बासिंदा
मै पूनम तुम्हारी यारी की
बेबाक चाहत है कुसूर मेरा
करबद्ध गुजारिश है तुमसे
बन जाओ सहराओ मे भटकते कारवाँ का हिस्सा
लौटा दो मुझे मेरी मोहब्बत
मेरा प्यार एतबार और एहसास
मेरी जिन्दगी ऩूरे रूखसार से रौशन कर दो
बेचेन रूह को आये करार
बस एक बार कह दो
हम पे है आपको एतबार

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव