पूनम की रात
शबनमी मोतियों की बरसात
तडपते मचलते दिली जजबात
बहुत बहुत आती है
शबनमी चाँदनी में
पूनम के दिन तुम्हारी याद
कैसे समझाऊ
दिले नादाँ मानता ही नही
चाँदनी पूनम की
पूनम का नूर
अमानत है सारे जहाँ की
नही सिर्फ तेरे गुलिस्ता के लिये
मै भृमर अंजान डगर
न कोई मंजिल है मेरी
ना ही कोई कारवाँ
दोनों जहान का बासिंदा
मै पूनम तुम्हारी यारी की
बेबाक चाहत है कुसूर मेरा
करबद्ध गुजारिश है तुमसे
बन जाओ सहराओ मे भटकते कारवाँ का हिस्सा
लौटा दो मुझे मेरी मोहब्बत
मेरा प्यार एतबार और एहसास
मेरी जिन्दगी ऩूरे रूखसार से रौशन कर दो
बेचेन रूह को आये करार
बस एक बार कह दो
हम पे है आपको एतबार
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Thursday, 11 August 2016
पूनम की रात
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