Thursday, 18 August 2016

यंत्र नारी पुज्यते तत्र रमनंते देव:

नारी में सृष्टी समाहित
सारे जग में प्यारी है
नारी कोई भोग्य वस्तु नहीं
वह माँ बहन भी हमारी है

नारी से ये जहाँ है
नारी से जमीं आसमाँ है
नारी से मानवता का अस्तित्व
नारी से मानव का कल्याण है

नारी से नर है
नारी से वर है
नारी से धरती
नारी से अम्बर है
नारी से वेद पुराण है
नारी से मानव उत्थान है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव