हरम में मचलती है हाला और बुतखाने में जगह पाती है
जहाँ में हरेक जगह सागरमय हाला कोहराम मचाती है
अपने होने का अहसास सागरमय मादक हाला कराती है
आधुनिक मधुशाला का कृतक अंजान की शरण पाती है
जहाँ में हरेक जगह सागरमय हाला कोहराम मचाती है
अपने होने का अहसास सागरमय मादक हाला कराती है
आधुनिक मधुशाला का कृतक अंजान की शरण पाती है
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