Friday, 19 August 2016

३५३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

हरम  में मचलती है हाला और बुतखाने में जगह पाती है
जहाँ  में हरेक जगह सागरमय हाला कोहराम मचाती है
अपने होने का अहसास सागरमय मादक हाला कराती है
 आधुनिक मधुशाला का कृतक अंजान की शरण पाती है


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव