Monday, 1 August 2016

३२० -३२१ मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

 एक राम नाम है सत्य जगत में और सच्ची मेरी मधुशाला
मेरी अंतिम यात्रा में जो कोई आयेगा पायेगा जी भरके हाला
गमे जिन्दगी के सुहाने सफर में साथ निभायेगी मादक हाला
शिवके गिले यात्रा के भुलाके मोहब्बत लुटायेगी रूपसी बाला

सारे जहाँ में गूँजेगा डंका और फैरायेगी पताका मेरी मधुशाला
कृतक मनोहर बैठ चौबारे साथ पियेंगे शबनमी मादक हाला
रास रचाते हुये पूनम की चाँदनी में मेघों से बरसेगी मादक हाला
अंजान डगर से आयेंगे परदेशी मेरी अपनी आधुनिक मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव