मेरी मधुशाला सदियों से थाती अब तलक पी ना सका हाला
तमाम कोशिशों के बाद मैं भरता और उलट देता मैं प्याला
मानव श्रम से भाग्य बदलता यही पढ़ा सुना मैंने विद्यालया
प्रबल भाग्य के सम्मुख निर्बल आज का मानव कहती बाला
तमाम कोशिशों के बाद मैं भरता और उलट देता मैं प्याला
मानव श्रम से भाग्य बदलता यही पढ़ा सुना मैंने विद्यालया
प्रबल भाग्य के सम्मुख निर्बल आज का मानव कहती बाला
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