Monday, 1 August 2016

३२१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

मेरी मधुशाला सदियों से थाती अब तलक पी ना सका हाला
तमाम कोशिशों के बाद मैं भरता और उलट देता मैं प्याला
मानव श्रम से भाग्य बदलता यही पढ़ा सुना मैंने विद्यालया
प्रबल भाग्य के सम्मुख निर्बल आज का मानव कहती बाला 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव