Monday, 1 August 2016

३२२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

सुरबाला के अक्षय सागरमय में कभी ना ख़त्म ही होती हाला
अगणित परदेशी अंजान डगर से नित नित आते मेरी मधुशाला
आते मेरी मधुशाला साकी बाला से पाते सागरमय अनुपम हाला
अमृत हाला पीके सारे जहाँ के गमो से मुक्ति पाते मेरी मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव