Monday, 1 August 2016

३२३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

कभी न करती कन्जूसी साकी बाला मुझको देने में मादक हाला
सराबोर वह कंचन सम सागरमय पैमाना  देती , मेरी मधुशाला
छलकती मोहब्बत मरमरीं जिस्म लबो से टपकती मादक हाला
चौबारे बैठ कृतक कुहुकता और गुण गाता मेरी अपनी मधुशाला

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव