कभी न करती कन्जूसी साकी बाला मुझको देने में मादक हाला
सराबोर वह कंचन सम सागरमय पैमाना देती , मेरी मधुशाला
छलकती मोहब्बत मरमरीं जिस्म लबो से टपकती मादक हाला
चौबारे बैठ कृतक कुहुकता और गुण गाता मेरी अपनी मधुशाला
सराबोर वह कंचन सम सागरमय पैमाना देती , मेरी मधुशाला
छलकती मोहब्बत मरमरीं जिस्म लबो से टपकती मादक हाला
चौबारे बैठ कृतक कुहुकता और गुण गाता मेरी अपनी मधुशाला
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