Monday, 1 August 2016

३२४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

सारा ज़माना दुत्कारता मुझको, कहता पियक्कड़ पीनेवाला
सदा हाथ में सागरमय होती राह पकड़ता मेरी अपनी मधुशाला
नहीं कोई ठौर जहां में पाता जो कोई कहलाता पियक्कड़ पीनेवाला
बड़े प्यार से शरणागत बनकर परदेशी को अपना लेती मधुशाला   

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव