अनजान पथिक अनजान डगर हरेक मोड़ पे पाता मेरी मधुशाला
सभी जगह मिलती रूपसी सुरबाला ,कोमल कर से पिलाती हाला
अपनी डगर मई चलते जाता नियत समय रोज़ पहुँचता मधुशाला
डगर डगर मस्जिद मंदिर मिलते,शीश झुकाता मैं अपनी मधुशाला
सभी जगह मिलती रूपसी सुरबाला ,कोमल कर से पिलाती हाला
अपनी डगर मई चलते जाता नियत समय रोज़ पहुँचता मधुशाला
डगर डगर मस्जिद मंदिर मिलते,शीश झुकाता मैं अपनी मधुशाला
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