Monday, 1 August 2016

३२५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

अनजान पथिक अनजान डगर हरेक मोड़ पे पाता मेरी मधुशाला
सभी जगह मिलती रूपसी सुरबाला ,कोमल कर से पिलाती हाला
अपनी डगर मई चलते जाता नियत समय रोज़ पहुँचता मधुशाला
डगर डगर मस्जिद मंदिर मिलते,शीश झुकाता मैं अपनी मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव