Tuesday, 2 August 2016

३२६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

कलकल छलछल सागरमय से गिरती पैमानें में मादक हाला
सहराओं में कुमुदनी खिलती मेघों से बरसती सोमरस हाला
परदेशी अनजान डगर चल नित नित आते मेरी मधुशाला
चहलकदमी करते अगणित जन अंजान डगर मेरी मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव