Tuesday, 2 August 2016

३२७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

अच्छे अच्छो को गिरते देखा मैंने चौबारे मेरी मधुशाला
राजा रंक सभी लोट लगाते पी अमृतसम सोमरस हाला  
अपने अपनो को हाथ थामकर उठाते दिल से यार लगाते
अपने अपनो का और गैरो का भेद मेरी मधुशाला मिटाते 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव