Tuesday, 2 August 2016

३२८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

देवालय में बैठ पियूँगा दिव्य अनुपम सागरमय  हाला
ध्यान करूँगा धुनि रमाऊँगा और पियूँगा मादक हाला
जर्रे जर्रे में मेरा रब बसता है भोग लगाऊ मेरी मधुशाला
रब से सीधे बात है होती पीकर अंजली भर मादक हाला


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव