देवालय में बैठ पियूँगा दिव्य अनुपम सागरमय हाला
ध्यान करूँगा धुनि रमाऊँगा और पियूँगा मादक हाला
जर्रे जर्रे में मेरा रब बसता है भोग लगाऊ मेरी मधुशाला
रब से सीधे बात है होती पीकर अंजली भर मादक हाला
ध्यान करूँगा धुनि रमाऊँगा और पियूँगा मादक हाला
जर्रे जर्रे में मेरा रब बसता है भोग लगाऊ मेरी मधुशाला
रब से सीधे बात है होती पीकर अंजली भर मादक हाला
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