Saturday, 6 August 2016

३४० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

मृदु मिट्टी के घटो में उबलती महुये की मादक अनुपम हाला
अग्नि की तपिस में महुये की मादक महक ने समा बदल डाला
झूमी फ़िज़ा झूमी कायनात झूमने लगी मेरी आधुनिक मधुशाला
झूमने लगे कृतक मनोहर अनजान डगर और रूपसी सुरबाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव