पूनम की खिली खिली सी चाँदनी में बरस रही शबनमी हाला
दिल की उमंगें जवां हो उठी देखके सुरबाला का हुस्न मतवाला
मेरी आधुनिक मधुशाला का रूप श्रृंगार किया खुद चंदा ने यारों
कोटि कोटि शबनमी मोतियों की उढा के चुनरी अदभुद आला
दिल की उमंगें जवां हो उठी देखके सुरबाला का हुस्न मतवाला
मेरी आधुनिक मधुशाला का रूप श्रृंगार किया खुद चंदा ने यारों
कोटि कोटि शबनमी मोतियों की उढा के चुनरी अदभुद आला
No comments:
Post a Comment