Saturday, 6 August 2016

३४१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

पूनम की खिली खिली सी चाँदनी में बरस रही शबनमी हाला
दिल की उमंगें जवां हो उठी देखके सुरबाला का हुस्न मतवाला
मेरी आधुनिक मधुशाला का रूप श्रृंगार किया खुद चंदा ने यारों
कोटि कोटि शबनमी मोतियों की उढा के चुनरी अदभुद आला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव