Saturday, 6 August 2016

३४२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

सावन की शबनमी मादक फुहार यु लगती यारों
अम्बर से बरस रही हो सोमरस अमृतसम हाला
मन के उपवन में खिली कुमुदनी महका तनमन
कूदती फुदकती चहक रही बाला गोरैया सी मधुशाला

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव