सावन की शबनमी मादक फुहार यु लगती यारों
अम्बर से बरस रही हो सोमरस अमृतसम हाला
मन के उपवन में खिली कुमुदनी महका तनमन
कूदती फुदकती चहक रही बाला गोरैया सी मधुशाला
अम्बर से बरस रही हो सोमरस अमृतसम हाला
मन के उपवन में खिली कुमुदनी महका तनमन
कूदती फुदकती चहक रही बाला गोरैया सी मधुशाला
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