Saturday, 6 August 2016

३३९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

रोज़ निकालता घर से कृतक अंजान और पहुंचता मदिराला
बाला की सागरमय पी  के चहकता मेरी आधुनिक मधुशाला
चहकती मेरी  मधुशाला में अंजान डगर परदेशी ने डेरा डाला
सप्त सुरो की सुरमई थाप पे बाला के नृत्य ने समा बदल डाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव