रोज़ निकालता घर से कृतक अंजान और पहुंचता मदिराला
बाला की सागरमय पी के चहकता मेरी आधुनिक मधुशाला
चहकती मेरी मधुशाला में अंजान डगर परदेशी ने डेरा डाला
सप्त सुरो की सुरमई थाप पे बाला के नृत्य ने समा बदल डाला
बाला की सागरमय पी के चहकता मेरी आधुनिक मधुशाला
चहकती मेरी मधुशाला में अंजान डगर परदेशी ने डेरा डाला
सप्त सुरो की सुरमई थाप पे बाला के नृत्य ने समा बदल डाला
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