सर्व सुलभ आसानी से अब सबको घर घर मिलती महुये की हाला
मधुशाला द्वारे खड़ी बाट जोहती कमसिन रूपसी विश्वमोहिनी बाला
कभी कभी यौवन रस हाला को तड़पता अंजान डगर परदेशी मतवाला
मेरी मधुशाला का की डगर आ ने को तड़पता नवयुवक मतवाला
मधुशाला द्वारे खड़ी बाट जोहती कमसिन रूपसी विश्वमोहिनी बाला
कभी कभी यौवन रस हाला को तड़पता अंजान डगर परदेशी मतवाला
मेरी मधुशाला का की डगर आ ने को तड़पता नवयुवक मतवाला
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