मानवता की दुश्मन कहलाती हेय दृष्टि से देखी जाती
कभी न सर्व प्रिय पेय पेय का दर्जा सागरमय है पाती
समाज से बाहर दूर गाँव के जगह मेरी मधुशाला पाती
चुम्बक सा आकर्षण इसमें राजा रंक का प्यार ये पाती
कभी न सर्व प्रिय पेय पेय का दर्जा सागरमय है पाती
समाज से बाहर दूर गाँव के जगह मेरी मधुशाला पाती
चुम्बक सा आकर्षण इसमें राजा रंक का प्यार ये पाती
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