Wednesday, 3 August 2016

३३६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

मानवता की दुश्मन कहलाती हेय दृष्टि से देखी जाती
कभी न सर्व प्रिय पेय पेय का दर्जा सागरमय है  पाती
समाज से बाहर दूर गाँव के जगह मेरी मधुशाला पाती
चुम्बक सा आकर्षण इसमें राजा रंक का प्यार ये पाती 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव