Wednesday, 3 August 2016

३३५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

हवाई किले रोज़ हूँ पीके रूपसी सुरबाला की सागरमय हाला
अनजान डगर चलके झूमता गाता आता हूँ मेरी मधुशाला
रूपसी बाला की अमृतसम मादक सागरमय पीके मेरे यारो
भू-लोक में जन्नत सा असीम सुख परदेशी पाता हूँ मेरी मधुशाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव