हवाई किले रोज़ हूँ पीके रूपसी सुरबाला की सागरमय हाला
अनजान डगर चलके झूमता गाता आता हूँ मेरी मधुशाला
रूपसी बाला की अमृतसम मादक सागरमय पीके मेरे यारो
भू-लोक में जन्नत सा असीम सुख परदेशी पाता हूँ मेरी मधुशाला
अनजान डगर चलके झूमता गाता आता हूँ मेरी मधुशाला
रूपसी बाला की अमृतसम मादक सागरमय पीके मेरे यारो
भू-लोक में जन्नत सा असीम सुख परदेशी पाता हूँ मेरी मधुशाला
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