Wednesday, 3 August 2016

३३४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

चार कदम चलता हूँ झूमता मचलता हूँ संभालता और चलता हूँ
अंजान डगर निकालता हूँ मंज़िल आधुनिक मधुशाला पहुँचता हूँ
रूपसी की सागरमय पीके कमल की मानिंद मेरे यारों खिलता हूँ
सुरबाला के नूरे रुखसार का दीवाना मैं परदेशी भौरों सा मचलता हूँ

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव