रूपसी के गज़रे ने परदेशी जादू कुछ ऐसा आज हमपे डाला
बगैर सागरमय प्याला छुये,कृतक अनजान हुआ मतवाला
रूपसी के गज़रे की मादक महक से फ़िज़ा हुई आज दीवानी
मेरी आधुनिक ई मधुशाला की फ़िज़ा लगती जानी पहिचानी
बगैर सागरमय प्याला छुये,कृतक अनजान हुआ मतवाला
रूपसी के गज़रे की मादक महक से फ़िज़ा हुई आज दीवानी
मेरी आधुनिक ई मधुशाला की फ़िज़ा लगती जानी पहिचानी
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