Wednesday, 3 August 2016

३३२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

तेरी अँखियों के कजरे से कृतक आज बनाउँगा हाला 
तेरे रुखसार के नूर से लबो का होगा अनुपम प्याला 
अंजान डगर से चलके परदेशीनित आते मेरी मधुशाला 
सारा ज़माना अपनी तेरी में भ्रमित आबाद मेरी मधुशाला  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव