Tuesday, 2 August 2016

३३१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

सतयुग में सागर मंथन से धरा पर आई अनुपम सोमरस हाला
कोमल कर से असुरो को पिला के भ्रमित कराती पिलाती हाला
रूपसी कमसिन बाला की सागरमय हाला ने भ्रमित कर डाला
नित नव परदेशी अंजान डगर ने मेरी मधुशाला चौबारे डेरा डाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव