सतयुग में सागर मंथन से धरा पर आई अनुपम सोमरस हाला
कोमल कर से असुरो को पिला के भ्रमित कराती पिलाती हाला
रूपसी कमसिन बाला की सागरमय हाला ने भ्रमित कर डाला
नित नव परदेशी अंजान डगर ने मेरी मधुशाला चौबारे डेरा डाला
कोमल कर से असुरो को पिला के भ्रमित कराती पिलाती हाला
रूपसी कमसिन बाला की सागरमय हाला ने भ्रमित कर डाला
नित नव परदेशी अंजान डगर ने मेरी मधुशाला चौबारे डेरा डाला
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