Tuesday, 2 August 2016

३३० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

 मृदु मिट्टी  के अनुपम पैमानों में महक उठती सागरमय हाला
दिल का उपवन महकने लगता पीकर सागरमय अनुपम हाला
दिल की कली केशर सी खिल जाती आ के  आधुनिक मधुशाला
मेरी जिन्दगी सागरमय अनुपम प्यार मेरा कमसिन सुरबाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव