Monday, 8 August 2016

३४४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

 सावन की दमकती काली घटाओं में हाला का शुरुर रंग लाता है
 रिमझिम सावन की मादक फुहारों में बाला का हुस्न गज़ब ढाता है
 मयखानों में पैमानों में मचलती हाला दिलों में हलचल मचाती है
 संगीत की मादक स्वर लहिरी पे थिरकती बाला क़यामत ढाती है 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव