Saturday, 10 September 2016

शबनमी मोतियों की चादर पे

तुमसे नित नई उम्मीद मिलती है
हरेक नये दिन के साथ
खवाबो  में नये तोहफे मई रोज़ पाता हूँ
जवाँ हसीं रातों के दामन में
शबनमी मोतियों की चादर पे
महबूबे मोहब्बत का बेपनाह प्यार पाता  हूँ
जवाँ निशा की बाहों में
मरमरी जिस्म की मादक महक
हुस्न की मलिका की
बेपनाह मोहब्बत पूनम की रात पाता हूँ
शबनमी मोतियों की चादर पे
सुनहरे ख्वाब दिल के हक़ीक़त में पाता हूँ

   मनोहर यादव

" अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव